प्रधानमंत्री मोदी का वाराणसी दौरा: 50,000 किसानों से संवाद और कृषि सहायिकाओं को मिला सम्मान

प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में 50,000 किसानों को संबोधित करते हुए PM-KISAN की 17वीं किस्त जारी की और 30,000 कृषि सहायिकाओं को प्रमाण पत्र देकर उनका सम्मान किया। इस दौरे में उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा और गंगा आरती में भाग लेकर सांस्कृतिक जुड़ाव भी दिखाया। यह कार्यक्रम कृषि सुधार, महिला सशक्तिकरण और किसानों की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। सरकार की यह नीति ग्रामीण भारत को मजबूत बनाने की ओर इशारा करती है।


18 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का दौरा किया, जो उनके तीसरे कार्यकाल की पहली यात्रा थी। इस अवसर पर उन्होंने मेहंदीगंज क्षेत्र में एक विशाल किसान सम्मेलन को संबोधित किया जिसमें लगभग 50,000 किसान उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 17वीं किस्त जारी

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 17वीं किस्त जारी की। इस योजना के तहत देशभर के करोड़ों किसानों को 2,000 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

30,000 कृषि सहायिकाओं को प्रमाण पत्र

प्रधानमंत्री ने इस दौरान 30,000 कृषि सहायिकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए, जिन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को नई तकनीकों और कृषि वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। ये महिलाएं कृषि परिवर्तन की अगुवा बन रही हैं और प्रधानमंत्री ने उनके योगदान को "भारत की असली शक्ति" बताया।

किसानों से सीधा संवाद: आत्मनिर्भरता की ओर कदम

प्रधानमंत्री ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि देश के किसान भारत की रीढ़ हैं और सरकार उन्हें तकनीकी सहायता, वित्तीय समर्थन और बाजार तक सीधी पहुंच देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा:

"हमारे किसानों को सिर्फ बीज और खाद नहीं, बल्कि नवाचार, ज्ञान और आत्मविश्वास की भी जरूरत है। हम उन्हें यह सब देने का संकल्प लेते हैं।"

काशी विश्वनाथ और गंगा आरती

इस आधिकारिक दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में भी भाग लिया। धार्मिक स्थलों की यह यात्रा प्रधानमंत्री की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव को दर्शाती है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण था। आगामी चुनावों को देखते हुए किसानों और ग्रामीण मतदाताओं को जोड़ना बीजेपी के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से अहम है। इसके साथ ही महिला कृषि सहायिकाओं को प्रोत्साहित करना सरकार की "नारी शक्ति" को सशक्त करने की नीति के अंतर्गत आता है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि इसमें भारत के कृषि भविष्य की स्पष्ट झलक देखने को मिली। किसानों के लिए आर्थिक सहायता, तकनीकी सशक्तिकरण, और महिला कृषि सहायिकाओं का सशक्तिकरण इस पूरे कार्यक्रम की मुख्यधारा में रहा।

सरकार की यह रणनीति कृषि क्षेत्र को नए युग में ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है — जहां किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माता भी हैं।



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