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भगवान बिरसा मुंडा: आदिवासी स्वाभिमान के प्रतीक और आज़ादी के योद्धा

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक वीरों ने अपना जीवन बलिदान किया, लेकिन उनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें इतिहास में उतनी प्रमुखता नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। भगवान बिरसा मुंडा ऐसे ही एक महान आदिवासी योद्धा , धार्मिक सुधारक , और सामाजिक क्रांतिकारी थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और “अबुआ राज” यानी “अपना राज” का सपना आदिवासी समाज को दिया। आज, 9 जून , वही दिन है जब बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों की कैद में आखिरी सांस ली थी। यह दिन हमें उनके बलिदान और योगदान की याद दिलाता है। Bhagwan Birsa Munda प्रारंभिक जीवन बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उलिहातू गांव , जिला खूंटी (झारखंड) में हुआ था। वे मुंडा जनजाति से थे, जो आदिवासी समुदाय का एक प्रमुख हिस्सा है। बचपन में ही उनका परिवार गरीबी और रोज़गार की तलाश में स्थानांतरित होता रहा। उन्होंने कुछ समय तक जर्मन मिशन स्कूल में भी पढ़ाई की, लेकिन जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि मिशनरियों द्वारा आदिवासियों पर सांस्कृतिक और धार्मिक हमला हो रहा है। अंग्रेजी हुकूमत और ज़मींदारी के खिलाफ संघर्ष बिरसा मुंडा ने देखा कि कैसे अंग्रेजों ने ज...
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21 मई: राजीव गांधी की पुण्यतिथि, एक स्मृति और संदेश नई दिल्ली, 21 मई 2025:  आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 34वीं पुण्यतिथि है। इस दिन को पूरे देश में “आतंकवाद विरोधी दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है, ताकि देशवासियों को आतंकवाद के खतरे से आगाह किया जा सके और शांति एवं सद्भाव के महत्व को समझाया जा सके। राजीव गांधी की शहादत: लोकतंत्र पर हमला 21 मई 1991 को जब राजीव गांधी तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे, तभी LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) से जुड़ी एक आत्मघाती महिला हमलावर धनु उन्हें माला पहनाने के बहाने पास आई। राजीव गांधी झुके ताकि वह माला पहना सके, ठीक उसी समय विस्फोट हुआ। विस्फोट इतना भयानक था कि राजीव गांधी सहित कई अन्य लोग मौके पर ही शहीद हो गए।  LTTE श्रीलंका में तमिल राज्य की मांग कर रहा था और भारत द्वारा श्रीलंका को सैन्य सहायता देने के कारण वह नाराज़ था। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया और भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला दिया। उनकी मृत्यु के बाद, भारत सरकार ने 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस (Anti...

Mysterious Places: दुनिया की सबसे मशहूर रहस्यमयी जगहें

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क्या आपने कभी ऐसी जगहों के बारे में सुना है, जो आज भी विज्ञान और तर्क की पकड़ से बाहर हैं? ऐसी जगहें जहाँ जहाज़ गायब हो जाते हैं, पत्थर खुद-ब-खुद खड़े हो जाते हैं, और जहाँ इंसानों के कदम कम ही पड़ते हैं। यहाँ हम आपको दुनिया की ऐसी ही 8 रहस्यमयी जगहों की सैर पर ले चलेंगे, जिनके बारे में जानकर आपका रोमांच और जिज्ञासा दोनों चरम पर पहुँच जाएंगे।  चाहे वो अटलांटिक महासागर का बर्मूडा ट्रायंगल हो, या पेरू की ऊँचाइयों में बसा माचू पिच्चू – हर स्थान अपने साथ एक अनकही कहानी और रहस्य समेटे हुए है। तो आइए, इन रहस्यों की दुनिया में एक दिलचस्प सफर शुरू करते हैं। 1. बर्मूडा ट्रायंगल (Bermuda Triangle)- अटलांटिक महासागर बर्मूडा ट्रायंगल अटलांटिक महासागर का एक रहस्यमयी क्षेत्र है, जो फ्लोरिडा, बर्मूडा और प्यूर्टो रिको के बीच फैला हुआ है। इसे "डैविल्स ट्रायंगल" भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ से कई जहाज़ और विमान बिना किसी चेतावनी के गायब हो चुके हैं। सदियों से यह इलाका वैज्ञानिकों, नाविकों और यात्रियों के लिए रहस्य बना हुआ है। कुछ लोग इसे चुंबकीय असंतुलन, खराब मौसम या इंसानी गलती का परिणाम मानते...
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भारत के परमाणु परीक्षण पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: 1974 की कहानी 18 मई 1974 को भारत ने Smiling Buddha के नाम से पहला परमाणु परीक्षण किया। इस कदम पर दुनिया की प्रतिक्रिया क्या थी? जानिए अमेरिका, चीन, पाकिस्तान समेत दुनियाभर की प्रतिक्रियाओं की पूरी कहानी। जब 18 मई 1974 को भारत ने पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया जिसका कोड का नाम "Smiling Buddha" था तो पूरी दुनिया एकदम चौंक गई। भारत जैसे विकासशील देश द्वारा परमाणु ताकत का प्रदर्शन सिर्फ तकनीकी चमत्कार नहीं था, बल्कि यह एक राजनीतिक बयान भी था। इसके बाद अलग-अलग देशों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग थीं, कुछ ने इसकी आलोचना की, कुछ ने चिंता जताई, तो कुछ ने इसे भारत की वैज्ञानिक उपलब्धि माना। मुख्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भारत के परमाणु परीक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण और जटिल रही। दुनिया भर के कई देश भारत के इस परमाणु परीक्षण को लेकर चौंक गए, और इसकी प्रतिक्रियाएं राजनीतिक, कूटनीतिक और तकनीकी स्तर पर देखने को मिलीं। अमेरिका (USA): अमेरिका को यह परीक्षण अचानक और अप्रत्याशित लगा। अमेरिका को डर...
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"Smiling Buddha" भारत का पहला परमाणु परीक्षण (1974) | पूरी जानकारी एक नजर में भारत ने 18 मई 1974 को एक ऐसा कदम उठाया जिसने उसे दुनिया की परमाणु शक्तियों की सूची में खड़ा कर दिया। इस ऐतिहासिक मिशन को कोड नेम दिया गया "Smiling Buddha"। आइए जानते हैं इस परीक्षण से जुड़ी हर जरूरी जानकारी एक ही नज़र में। परीक्षण सफल होने के बाद की तस्वीर "We will not be the first to use nuclear weapons, but we must have them to protect ourselves." – Indira Gandhi 18 मई 1974, सुबह 8:05 बजे राजस्थान के पोखरण रेंज में एक ऐसा धमाका हुआ जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। भारत ने पहली बार परमाणु शक्ति का प्रदर्शन किया और दुनिया के सामने अपनी scientific और strategic ताकत का इज़हार किया। इस मिशन का कोड नाम था – "Smiling Buddha" । क्या था Smiling Buddha? "Smiling Buddha" भारत का पहला underground nuclear test था। इसे "Pokhran-I" भी कहा जाता है। इस नाम को इसलिए चुना गया क्योंकि टेस्ट वाले दिन गौतम बुद्ध जयंती थी, एक शांत प्रतीक के साथ भारत ने शक्ति का प्रदर...
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बौद्ध पूर्णिमा 2025: बुद्ध का संदेश, शांति का उत्सव बौद्ध पूर्णिमा 2025 पर जानें भगवान बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण, के बारे में। इस पवित्र दिन का धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व, परंपराएँ और बुद्ध का शांति व करुणा से भरा संदेश। भारत की सबसे बड़ी बुद्ध प्रतिमा बोधगया, बिहार में स्थित 18 मई 2025, रविवार को हम मना रहे हैं बौद्ध पूर्णिमा, एक ऐसा दिन जो न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति, करुणा और आत्मज्ञान का प्रतीक है। यह दिन गौतम बुद्ध की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को समर्पित है: जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण। बौद्ध पूर्णिमा का महत्व बौद्ध पूर्णिमा या वैशाख पूर्णिमा को भगवान बुद्ध की त्रिगुण संयोग तिथि माना जाता है, बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म दोनों के लिए एक अत्यंत पवित्र दिन है। यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ है: जन्म:  यही वह दिन है जब वे लुंबिनी (नेपाल) में जन्मे थे। ज्ञान प्राप्ति (बोधि):  उन्होंने बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे बोधि ज्ञान प्राप्त...

Petra: Ancient Historical City

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पेट्रा, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला और चट्टानों को काटकर बनाए गए भवनों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी इसी खूबसूरती के कारण इसे दुनिया के 7 नए अजूबों में शामिल किया गया है। इसका निर्माण लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में किया गया था। आज पेट्रा एक पर्यटक स्थल बन चूका है। जहां दुनिया भर से लोग इसकी खूबसूरती देखने है,  आइये जानते है पेट्रा से जुडी  कुछ ख़ास बाते- पेट्रा: एक प्राचीन चमत्कार का परिचय “Petra” शब्द ग्रीक भाषा का है, जिसका मतलब होता है – “चट्टान” । जो दक्षिणी जॉर्डन के रेगिस्तानी इलाके में, वादी मूसा (Wadi Musa) नामक स्थान के पास स्थित है। इसका निर्माण लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व  (5th century BCE)   में नबातियन सभ्यता (Nabataean Civilization) द्वारा किया गया था। जो एक प्राचीन अरबी जनजाति थी। यानी, अगर हम इसे शताब्दी में गिनें तो यह ईसा पूर्व की 6वीं से 5वीं सदी (लगभग 2500 साल पहले ) के बीच का समय माना जाता है।  पेट्रा अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ इमारतों को सीधे चट्टानों को काटकर बनाया गया है। Petra का सबसे प्रसिद्ध स्मारक Al-Khazn...