ETGE का चीन-केंद्रीय एशिया समझौते पर कड़ा विरोध, क्षेत्रीय संप्रभुता पर गंभीर खतरा

पूर्वी तुर्किस्तान सरकार निर्वासित (ETGE) ने चीन-केंद्रीय एशिया समझौते "अस्ताना घोषणा" और "सदाबहार संधि" की कड़ी आलोचना की है। ETGE का कहना है कि ये समझौते केंद्रीय एशिया की संप्रभुता को कमजोर कर चीन के साम्राज्यवादी विस्तार को बढ़ावा देते हैं। जानिए ETGE की चेतावनी और इस क्षेत्र पर चीन के दावे का सच।


पूर्वी तुर्किस्तान सरकार निर्वासित (ETGE) ने हाल ही में कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित दूसरे चीन-केंद्रीय एशिया शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षरित "अस्ताना घोषणा" और "सदाबहार अच्छे पड़ोसीपन, मित्रता और सहयोग संधि" की कड़ी आलोचना की है। ETGE ने इसे क्षेत्रीय संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा बताते हुए इसे चीनी साम्राज्यवाद का विस्तार करार दिया है।

ETGE के अध्यक्ष ममतिमिन आला ने कहा कि ये समझौते केंद्रीय एशिया के पांच देशों — कजाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान — को चीन के अधीनस्थ बनाने की नीति को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ये देश अपनी राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा नीतियों को चीन के अधीन रखकर अपनी संप्रभुता खो रहे हैं। ETGE का आरोप है कि ये देश चीन के "वन-चाइना प्रिंसिपल" और आतंकवाद, अलगाववाद व उग्रवाद के खिलाफ संयुक्त रुख को स्वीकार कर चीन के औचित्य को मान्यता दे रहे हैं, जो पूर्वी तुर्किस्तान के खिलाफ चीन की नीतियों का आधार है।

पूर्वी तुर्किस्तान पर चीन के कब्जे के बाद से यहां मानवाधिकार हनन की घटनाएं बढ़ी हैं। 1949 से चीन ने इस क्षेत्र को उपनिवेश बनाया है और 2014 से व्यापक नरसंहार, जबरन पुनर्वास, सांस्कृतिक विनाश, लाखों तुर्किक लोगों की हिरासत, और युवा पीढ़ी के अंगों की जबरन कटाई जैसी अमानवीय गतिविधियों को अंजाम दिया है। ETGE के अनुसार, चीन इस क्षेत्र का उपयोग अब केंद्रीय एशिया के अन्य देशों पर विस्तार के लिए रणनीतिक आधार के रूप में कर रहा है।

"अस्ताना घोषणा" और "सदाबहार संधि" चीन के प्रभाव को स्थायी रूप से स्थापित करने के लिए कानूनी और राजनीतिक ढांचा प्रदान करती हैं। इससे ये देश केवल कागज़ पर स्वतंत्र हैं, जबकि व्यावहारिक रूप से वे चीन के नियंत्रण में आ चुके हैं। ETGE के विदेश मंत्री सलीह हुडयार ने कहा कि केंद्रीय एशियाई नेता अपनी संप्रभुता को गवां रहे हैं और इसे बुनियादी ढांचे और आर्थिक लाभों के लिए त्याग रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि पूर्वी तुर्किस्तान में जो हुआ, वही पूरी क्षेत्र में होने वाला है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील

पूर्वी तुर्किस्तान सरकार निर्वासित (ETGE) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, लोकतांत्रिक देशों, और वैश्विक संस्थाओं से जोरदार अपील की है कि वे "अस्ताना घोषणा" और "सदाबहार संधि" को चीन के साम्राज्यवादी विस्तार की एक नई रणनीति के रूप में पहचानें। ETGE के अनुसार, यह समझौता केवल सतही विकास के बहाने चीन की विस्तारवादी नीतियों को वैधता देने का प्रयास है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय एशियाई देश अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की कीमत पर चीन के प्रभाव में आ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन अपनी आर्थिक और सुरक्षा ताकत का इस्तेमाल करते हुए इन देशों को अपनी नीतियों के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रहा है। यह रणनीति चीन को न केवल आर्थिक संसाधनों और रणनीतिक भौगोलिक स्थानों तक पहुंच प्रदान करती है, बल्कि राजनीतिक और सैन्य रूप से भी उसे मजबूत बनाती है। इसका नतीजा यह होता है कि ये देश अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने में असमर्थ हो जाते हैं और चीन के दबाव में अपनी आंतरिक नीतियों को प्रभावित होने देते हैं।

ETGE ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्रीय एशियाई देश इस स्थिति को गंभीरता से न लें और स्वतंत्र नीति न अपनाएं, तो उनकी राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा होगा। चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एक ठोस और संतुलित रणनीति जरूरी है, जिससे आर्थिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय संप्रभुता की भी रक्षा हो सके।

इस चुनौती का सामना करने के लिए क्षेत्रीय देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज उठानी होगी और लोकतांत्रिक एवं विकासशील देशों के साथ मजबूत साझेदारी बनानी होगी ताकि चीन के बढ़ते प्रभुत्व को सीमित किया जा सके। इसके अलावा, आर्थिक विविधता लाकर, सुरक्षा सहयोग बढ़ाकर और सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करके क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता है।

इस प्रकार, केंद्रीय एशिया के लिए यह समय निर्णायक है, जब उन्हें चीन के दबावों के सामने अपनी स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सक्रिय और संयुक्त प्रयास करने होंगे, ताकि वे अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों को सुरक्षित रख सकें।

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