Russian missile और drone हमलों से दहला यूक्रेन: राजधानी कीव में 4 की मौत

 Source| Ap News

यूक्रेन में रूस ने मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया, जिसमें कीव समेत कई शहरों को निशाना बनाया गया। जानें इस विनाशकारी हमले की पूरी तस्वीर, कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं और शांति की असफल कोशिशों का सच।

6 जून की रात यूक्रेन के लिए फिर एक भयावह अध्याय बनकर आई, जब रूस ने मिसाइलों और ड्रोन का व्यापक हमला किया। राजधानी कीव समेत देश के कई हिस्सों में हुए इस समन्वित हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि यह हमला बीते तीन वर्षों में हुए सबसे बड़े रूसी हमलों में से एक था।

रूसी हमले में कुल 407 ड्रोन और 44 मिसाइलों का उपयोग किया गया, जिनका निशाना यूक्रेन के छह से अधिक क्षेत्र थे। यूक्रेनी वायु सेना के प्रवक्ता यूरी इहनात ने जानकारी दी कि इस हमले में बैलिस्टिक, क्रूज मिसाइलों के साथ स्ट्राइक ड्रोन और नकली लक्ष्यों का भी इस्तेमाल किया गया।

वायु रक्षा की चुनौतियाँ

यूक्रेनी वायु सेना ने बहादुरी से इस हमले का जवाब दिया और करीब 200 से अधिक ड्रोन और 30 से अधिक क्रूज मिसाइलों को मार गिराया। हालांकि, गिरते मलबे, फटती मिसाइलों और फैलती आग से जानमाल का भारी नुकसान हुआ। कीव के कई हिस्सों में विस्फोटों की आवाजें रात भर गूंजती रहीं। शहर के प्रशासनिक प्रमुख तैमूर तकाचेंको ने नागरिकों से आश्रय स्थलों में रहने की अपील की और बताया कि वायु रक्षा दल लगातार सक्रिय थे।

नागरिकों की पीड़ा

हमले की भयावहता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि चौदह वर्षीय विटालिना वसिलचेंको ने बताया कि एक विस्फोट से उनकी खिड़की उड़ गई और उसके बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे ज़िंदगी खत्म हो रही हो। "मुझे लगा मैं मरने वाली हूँ। मेरा पूरा जीवन मेरी आंखों के सामने घूम गया," उन्होंने कहा।

यूक्रेन के मानवाधिकार प्रमुख दिमित्रो लुबिनेट्स ने रूस के इस कृत्य को आतंकवादी कार्य बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़ी प्रतिक्रिया की मांग की। उनका कहना था कि यह हमला नागरिक बुनियादी ढांचे और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

कीव में आपातकालीन कर्मियों की शहादत

कीव में तीन आपातकालीन कर्मचारियों की जान इस हमले में चली गई, जो आग बुझाने और लोगों को बचाने के दौरान मारे गए। कीव के सोलोमियांस्की जिले में एक 16 मंज़िला इमारत की 11वीं मंजिल पर आग लग गई, और कई अन्य इमारतों में भी भारी नुकसान हुआ। हमले में शहर की मेट्रो पटरियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं और 2,000 से अधिक घरों में बिजली बाधित हो गई।

देशभर में तबाही

इस हमले ने सिर्फ कीव को नहीं, बल्कि पूरे यूक्रेन को झकझोर दिया। पश्चिमी शहर टेरनोपिल, पोल्टावा, खमेलनित्सकी, ल्वीव और चेर्निहिव जैसे क्षेत्रों में भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की पुष्टि हुई है। टेरनोपिल में 10 लोग घायल हुए, जबकि पोल्टावा में प्रशासनिक इमारतें और एक कैफे क्षतिग्रस्त हुआ। खमेलनित्सकी में एक आवासीय भवन समेत कई वाहन और ढांचें क्षतिग्रस्त हुए। ल्वीव में तीन रूसी मिसाइलों को मार गिराया गया।

चेर्निहिव क्षेत्र में एक शाहेद ड्रोन की चपेट में आने से अपार्टमेंट की खिड़कियाँ और दरवाज़े टूट गए। काला सागर के ऊपर रूस ने यूक्रेनी 'नेप्च्यून' मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया।

रूस में भी हमलों की खबरें

रूस ने दावा किया कि मॉस्को और तीन अन्य क्षेत्रों में यूक्रेनी ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया गया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन के अनुसार, राजधानी की ओर बढ़ रहे 10 ड्रोन मार गिराए गए। बेलगोरोड क्षेत्र में एक ट्रेन भी विस्फोट से पटरी से उतर गई। हालांकि रूस ने इन हमलों में सिर्फ 3 नागरिकों के घायल होने की पुष्टि की है।

कूटनीति विफल, शांति की कोशिशें जारी

रूस और यूक्रेन के बीच अब तक दो दौर की शांति वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने 30 दिनों के युद्धविराम की और पुतिन के साथ सीधी बातचीत की पेशकश की, लेकिन क्रेमलिन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच फोन वार्ता भी चर्चा में रही। पुतिन ने कहा कि रूस यूक्रेन के लंबी दूरी के दुस्साहसिक हमलों का जवाब देगा। ट्रम्प की टिप्पणी कि "यूक्रेन और रूस को थोड़ी देर और लड़ने दिया जाना चाहिए" से भी कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगा।

क्या यह युद्ध किसी नतीजे तक पहुँचेगा?

रूस और यूक्रेन के बीच यह संघर्ष अब एक विनाशकारी स्थायी स्थिति बन चुका है। रोजाना होने वाले हमले, नागरिकों की मौतें और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच शांति की उम्मीद कम होती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और प्रभावहीन प्रतिक्रिया इस संकट को और बढ़ा सकती है।

अब ज़रूरत है कि दुनिया एकमत होकर एक स्पष्ट और निर्णायक रुख अपनाए। वरना यह युद्ध धीरे-धीरे वैश्विक संकट की ओर बढ़ सकता है, जिसमें हर देश किसी न किसी रूप में शामिल हो सकता है।

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