Flash flood devastates Nepal-China border; 9 dead, 19 missing, rescue operations continue

 रसुवा [नेपाल]नेपाल-चीन सीमा पर मंगलवार को आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई है और 19 लोग अब भी लापता हैं। इस बाढ़ ने जनजीवन, सड़क, पुल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और व्यापारिक ढांचे को तहस-नहस कर दिया है।

फ्लैश फ्लड तिब्बत की ल्हेंदे नदी में अचानक पानी बढ़ने के कारण आई, जिससे इलाके में खड़ी गाड़ियां मलबे में दब गईं और सड़कें बह गईं। तीन दिन बाद भी रसुवागढ़ी-टिमुरे क्षेत्र पूरी तरह से देश से कटा हुआ है। नेपाल सेना और स्थानीय लोग खतरनाक ढलानों पर चढ़कर राहत कार्य में जुटे हैं।

फ्लड से बचे राम बहादुर थारू ने ANI को बताया: “मैंने अपने दोस्तों को सतर्क किया था, लेकिन पानी ने उन्हें बहा दिया। मैं ऊपरी क्षेत्र में जाकर बच पाया।” राम बहादुर 13 लोगों के समूह में से 7 लोगों के साथ बच गए, जबकि 6 साथी अब भी लापता हैं।

सड़क, पुल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह

फ्लड में मितेरी ब्रिज (Nepal-China Friendship Bridge) जो नेपाल और चीन को जोड़ता था, वह भी ध्वस्त हो गया। कंटेनर ट्रक और इलेक्ट्रिक गाड़ियां बाढ़ में खिलौनों की तरह बह गईं।

  • 1,100 मीटर से अधिक सड़क 10 जगहों पर क्षतिग्रस्त।

  • चार हाइड्रोपावर प्लांट बुरी तरह क्षतिग्रस्त।

  • रसुवागढ़ी ड्राई पोर्ट काम नहीं कर रहा।

  • भारी मशीनरी की कमी से राहत कार्य में बाधा।

बिना चेतावनी आई बाढ़

थारू ने कहा: “हमें बाढ़ के बारे में कोई चेतावनी नहीं दी गई थी। हमें लगा जैसे भूकंप आ गया हो और अचानक नदी में पानी बढ़ता चला गया।”

नेपाल के अधिकारियों का मानना है कि चीन की ओर से ग्लेशियल लेक फटने और भारी बारिश के कारण भोटेकोशी नदी में पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे यह आपदा आई। चीन से रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग सिस्टम की कमी के कारण नेपाली अधिकारी बाढ़ के आने से अनजान थे।

राहत और बचाव कार्य जारी

रसुवा के मुख्य जिला अधिकारी अर्जुन पौडेल ने बताया कि अब तक 150 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 127 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा: “इलाके में बिजली और फोन सेवा ठप होने से राहत कार्य में दिक्कत आ रही है। सीमित संचार साधनों से चीन की ओर संपर्क किया जा रहा है और बचाव कार्य के साथ-साथ बिजली और फोन सेवा बहाल करने की कोशिश जारी है।”

अधिकारियों को आशंका है कि कई लापता लोग कस्टम यार्ड में मलबे में दबे हो सकते हैं या बह गए होंगे। खराब सड़कें और भारी मशीनरी की कमी राहत कार्य में बड़ी बाधा बनी हुई है। राहत टीम लगातार 24 घंटे कार्य कर रही है।

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