Pakistan Denies Baloch Leaders' Families and Lawyers Access Amid Human Rights Concerns

पाकिस्तान ने बलूच नेताओं की हिरासत के दौरान परिवारों और वकीलों से मुलाकात पर लगाई रोक

बलूचिस्तान [पाकिस्तान]: पाकिस्तान में बलूच नेताओं की गैरकानूनी हिरासत और उनके परिवारों तथा वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति न दिए जाने पर पूरे क्षेत्र में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश और चिंता फैल गई है। बलूच यकजेहती समिति (BYC) ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की आड़ में किया गया गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए पाकिस्तान सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है।

BYC के एक्स पर जारी बयान में खुलासा किया गया है कि 8 जून को महरंग बलूच, शाह जी, बीबागर बलूच, गफ्फार बलूच, गुलज़ादी और बीबो बलूच सहित कई बलूच नेताओं को क्वेटा के हुड्डा जिला कारागार से अचानक 10 दिन की पुलिस रिमांड पर सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया। तब से इन नेताओं को परिवार और कानूनी सलाहकारों से पूरी तरह से अलग रखा गया है। परिजनों और वकीलों द्वारा बार-बार की गई मुलाकात की अपीलों को पुलिस ने सख्ती से खारिज कर दिया है।

अदालती आदेश के बावजूद पुलिस ने रोकी मुलाकात

BYC ने यह भी कहा कि परिवारों ने मुलाकात की अनुमति के लिए अदालती आदेश भी प्राप्त किए, इसके बावजूद पुलिस ने हिरासत में लिए गए नेताओं से किसी भी प्रकार की मुलाकात की अनुमति नहीं दी। केवल महरंग बलूच और बीबो बलूच की माताओं को कुछ मिनटों के लिए मुलाकात करने की अनुमति दी गई, जिससे परिवारों में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है। बलूचिस्तान में हिरासत में यातना और दुर्व्यवहार की बढ़ती रिपोर्टों के बीच यह चिंता और गहरी हो गई है।

पुलिस स्टेशन के बाहर परिवारों का शांतिपूर्ण धरना

पारदर्शिता और हिरासत में लिए गए नेताओं तक पहुँच की माँग को लेकर परिजनों ने सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन के बाहर शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया है। BYC ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार द्वारा अदालती आदेशों और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान न करना एक जानबूझकर की गई कार्रवाई है, ताकि बलूच राजनीतिक आवाजों को दबाया जा सके और उन्हें गैरकानूनी रूप से अपराधी साबित किया जा सके।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप की अपील

BYC ने हिरासत में लिए गए नेताओं को बलूच मानवाधिकार रक्षकों पर केंद्रित हमला करार देते हुए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से तत्काल हस्तक्षेप करने और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की माँग की है।

बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम विकसित प्रांत है, लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, जबरन गायब किए जाने और मनमानी हिरासत का केंद्र रहा है। पिछले एक दशक में, और विशेष रूप से हाल के वर्षों में, ऐसे मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है, जिसकी स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कई बार निंदा की है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और बलूच समुदाय ने पाकिस्तान सरकार से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को पारदर्शिता के साथ पेश करने और उनके परिवारों तथा कानूनी सलाहकारों से मिलने की अनुमति देने की मांग की है ताकि बलूचिस्तान में बढ़ती मानवाधिकार हनन की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

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