Pakistan’s State-Sponsored Terrorism Persists, Fails to Deliver Justice to 26/11 Victims: MEA Report

नई दिल्ली [भारत]: पाकिस्तान समर्थित सीमा पार आतंकवाद की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है, जबकि पाकिस्तान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने में लगातार सक्रिय रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने मुंबई 26/11 हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने में कोई मदद नहीं की और आतंकवादियों को पनाह देना जारी रखा है।

पाकिस्तान पर राज्य प्रायोजित आतंकवाद के गंभीर आरोप

रिपोर्ट में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित कई आतंकवादी और उनके संगठन अब भी पाकिस्तान में शरण लिए हुए हैं। भारत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि दोनों देशों के बीच सभी मुद्दों को द्विपक्षीय और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए, लेकिन इसके लिए आतंक, हिंसा और शत्रुता से मुक्त वातावरण आवश्यक है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से बार-बार सीमा पार आतंकवाद और मनगढ़ंत, शत्रुतापूर्ण दुष्प्रचार का सामना भारत को करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य-ग्रेड हथियार, ड्रोन, संचार उपकरण, आतंकवादियों की घुसपैठ के लिए सुरंगों का उपयोग, और हथियारों व मादक पदार्थों की तस्करी पाकिस्तान के राज्य प्रायोजित आतंकवाद का प्रमाण हैं।

विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा कि 26/11 मुंबई आतंकी हमले के करीब 16 वर्षों बाद भी पाकिस्तान ने पीड़ितों को न्याय दिलाने में कोई ईमानदारी नहीं दिखाई।

भारत-पाक संबंधों में गतिरोध

रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ने अगस्त 2019 के बाद से भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर किया, जिससे व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क बाधित हुआ।

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर भी चिंता व्यक्त की। भारत ने अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों, सांस्कृतिक विरासत और जबरन धर्म परिवर्तन व विवाह के मुद्दे को पाकिस्तान के समक्ष उठाया है।

रिपोर्ट में वर्ष 2024 तक की घटनाओं का उल्लेख है, इसलिए हाल ही में हुए पहलगाम हमले और उसके बाद की घटनाओं को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

भारत-चीन संबंध: वार्ता से सीमा विवाद सुलझाने में मिली प्रगति

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन के साथ कई दौर की वार्ता ने लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद की। इन वार्ताओं में कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः शुरू करना, दोनों देशों के बीच नियमित उड़ानों की बहाली और नदियों का डेटा साझा करने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

रिपोर्ट में कहा गया कि जून 2020 (गलवान संघर्ष) के बाद से दोनों देशों ने 18 दौर की WMCC और 21 दौर की वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तर की बैठकें कीं। 2024 में इन बैठकों के बाद अक्टूबर 2024 में LAC पर गश्त व्यवस्था पर एक समझौता हुआ, जिससे लद्दाख में 2020 से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ।

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर, 2024 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की, जो पांच वर्षों में प्रतिनिधिमंडल स्तर की पहली मुलाकात थी। पीएम मोदी ने सीमा मामलों में मतभेद रोकने और सीमा पर शांति बनाए रखने पर बल दिया।

दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि सीमा विवाद समाधान में विशेष प्रतिनिधि तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और विदेश मंत्रियों व अन्य अधिकारियों के संवाद तंत्र का उपयोग संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्मित करने में किया जाएगा। शिखर बैठक से इतर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी तीन बार चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात कर संबंध सामान्य बनाने पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट से स्पष्ट है कि पाकिस्तान के राज्य प्रायोजित आतंकवाद और 26/11 के पीड़ितों को न्याय न देने की निष्क्रियता ने भारत-पाक संबंधों को बाधित किया है, जबकि भारत-चीन संबंधों में संवाद और कई दौर की वार्ता से सकारात्मक प्रगति हुई है।

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