SBI Report: Tariff Wars Driven by Deep Global Economic Imbalances Between Nations

एसबीआई रिपोर्ट: देशों के बीच आर्थिक असंतुलन के कारण टैरिफ युद्ध बढ़ रहे हैं


नई दिल्ली [भारत]: वैश्विक व्यापार युद्धों में हालिया वृद्धि देशों के बीच गहरे आर्थिक असंतुलन का परिणाम है, यह बात भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) फंड्स मैनेजमेंट की नई रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा व्यापार तनाव केवल टैरिफ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में बुनियादी असंतुलन को उजागर करता है।

अमेरिका और चीन के बीच असंतुलन की गहराई

एसबीआई रिपोर्ट के मुताबिक: "टैरिफ का मुद्दा अमेरिका और चीन के बीच गहरे आर्थिक असंतुलन को उजागर करता है।"

चीन में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 42% निवेश होता है, जबकि उपभोग केवल 40% पर है। इसके विपरीत, अमेरिका में GDP का केवल 22% निवेश होता है, जबकि उपभोग दर 68% तक जाती है।
भारत इस असंतुलन में मध्य स्थिति में है, जहां GDP का 33% निवेश और 62% उपभोग पर आधारित है।

इस विरोधाभास के कारण अमेरिका और चीन के बीच भारी व्यापार घाटा पैदा हो गया है, जिसके चलते दोनों देशों ने व्यापार घाटे को कम करने के लिए टैरिफ जैसे कदम उठाए हैं।

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार घाटे के आंकड़े

  • अमेरिका का वार्षिक वस्तु व्यापार घाटा: 1,202 अरब अमेरिकी डॉलर।

  • चीन का वार्षिक व्यापार अधिशेष: 992 अरब अमेरिकी डॉलर।

  • भारत का व्यापार घाटा: 275 अरब अमेरिकी डॉलर।

इसके अलावा, अमेरिका का चालू खाता शेष GDP का -3.2% ऋणात्मक है, जबकि चीन का चालू खाता शेष 1.4% अधिशेष में है।

बचत और ऋण का अंतर

एसबीआई रिपोर्ट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बचत और ऋण के असंतुलन को भी रेखांकित किया।

  • अमेरिका GDP का केवल 18% बचाता है।

  • चीन GDP का 43% और भारत 33% बचाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह असंतुलन अमेरिका को दुनिया में अधिशेष वस्तुओं का सबसे बड़ा उपभोक्ता बनाता है, जिसके कारण उसका विदेशी ऋण स्तर 27.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले, चीन का विदेशी ऋण केवल 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर और भारत का 0.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।

टैरिफ युद्ध केवल अस्थायी नहीं, बल्कि संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत

रिपोर्ट में कहा गया: "यह केवल एक अल्पकालिक संघर्ष नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक मौलिक बदलाव है जो आने वाले वर्षों में भी जारी रह सकता है।"

अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाले इस असंतुलन को दूर करने के लिए टैरिफ जैसे उपायों के साथ कानूनी प्रावधानों का भी इस्तेमाल कर सकता है।
एसबीआई रिपोर्ट ने कहा कि टैरिफ में कोई भी वृद्धि धीरे-धीरे 2025 तक लागू होने की उम्मीद है, लेकिन अमेरिका व्यापार उपायों को लागू करने के लिए अन्य वैकल्पिक साधनों का भी उपयोग कर सकता है।

अमेरिका और चीन की रणनीतिक दिशा

ट्रम्प प्रशासन ने चीन पर अमेरिका की निर्भरता कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया है। इसके साथ ही अमेरिका में ऋण स्तर की दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।
दूसरी ओर, चीन भी अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के प्रयास कर रहा है। इसके लिए सीमा पार भुगतान प्रणालियों और कमोडिटी एक्सचेंजों में सुधार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

एसबीआई की रिपोर्ट वैश्विक अर्थव्यवस्था में असंतुलन के गहराते प्रभावों को रेखांकित करती है, जो व्यापार युद्धों और टैरिफ विवादों के रूप में सामने आ रहे हैं।
जब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में उपभोग और निवेश के बीच संतुलन नहीं बनता, टैरिफ युद्ध और व्यापार विवाद जैसे मुद्दे वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए चुनौती बने रहेंगे।

रिपोर्ट इस ओर संकेत करती है कि निवेशकों और नीति-निर्माताओं को आने वाले वर्षों में व्यापार रणनीतियों, वैकल्पिक बाजारों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन पर ध्यान देना होगा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Trump Harvard Visa Block Fails: Federal Judge Issues Powerful Ruling on International Students

JP Nadda Highlights Investment Opportunities in India During Meeting with Saudi-India Business Council Head